Philosophy(दर्शनशास्र) Meaning in Hindi

Philosophy is that knowledge and science which is based on ultimate truth and principles. We can thus say that Philosophy is in fact the science of individual society and the general laws of the process of human thought and cognition. Philosophy is the name of that discipline which seeks truth which seeks knowledge. It is very important for us humans to have the experience of philosophy, so that we can understand ourselves, that is why different people of the world from time to time adopt different types of life philosophy according to their experience and circumstances. A new philosophy has been given to this stream, the history of Indian philosophy is really very old, it is a philosophy acquired from generation to generation, it is considered almost impossible or can be considered to go to its root, but in the sense of philosophy, the term philosophy was first used in written form. Philosophy as a distinct discipline and science was developed by Plato by Pythagoras.



दर्शनशास्त्र (Philosophy) वह ज्ञान है जो परम् सत्य और सिद्धान्तों, और उनके कारणों की विवेचना करता है

The study of the fundamental nature of knowledge, reality, and existence, especially when considered as an academic discipline.

A theory or attitude that acts as a guiding principle for behaviour.
“don’t expect anything and you won’t be disappointed, that’s my philosophy”

दर्शनशास्त्र वह ज्ञान और विज्ञान है जो परम सत्य और सिद्धांतों पर आधारित है अगर हम दर्शनशास्त्र की विवेचना करते हैं तो हम यह समझ पाएंगे दर्शनशास्त्र यथार्थ की परख के लिए एक दृष्टिकोण है जोकि मुख्य रूप से दार्शनिक चिंतन मूलतः जीवन की अर्थव्यवस्था की खोज का पर्याय है हम इस प्रकार से यह कह सकते हैं कि दर्शनशास्त्र वस्तुतः स्वत्व समाज और मानव चिंतन तथा संज्ञान की प्रक्रिया के सामान्य नियमों का विज्ञान है दर्शनशास्त्र सामाजिक चेतना के रूप में मानव को सत्यता की खोज और चेतना के रूप में एक है हम यह कह सकते हैं कि दर्शन उस विद्या का नाम है जो सत्य की खोज करता है जो ज्ञान की खोज करता है अगर हम इसके व्यापक अर्थ में दर्शनशास्त्र को समझने का प्रयास करें तो दर्शनशास्त्र तर्कपूर्ण विधि पूर्ण एवं क्रमबद्ध विचारों की कला है इसका जन्म अनुभव एवं परिस्थिति के अनुसार होता है हम मनुष्य को दर्शनशास्त्र का अनुभव होना बहुत जरूरी है जिससे हम अपने आप को समझ पाते हैं यही कारण है कि संसार के विभिन्न व्यक्तियों के समय-समय पर अपने अनुभव और परिस्थितियों के अनुसार भिन्न भिन्न प्रकार के जीवन दर्शन को अपनाकर इस धरती को इस धारा को एक नया दर्शन दिया है भारतीय दर्शन का इतिहास वास्तव में अत्यंत पुराना है यह पीढ़ी दर पीढ़ी अर्जित दर्शन है इसकी जड़ तक जाना लगभग असंभव माना जाता है या माना जा सकता है किंतु दर्शनशास्त्र के अर्थों में दर्शनशास्त्र पद का प्रयोग सर्वप्रथम लिखित रूप में किया गया था पाइथागोरस के द्वारा और विशिष्ट अनुशासन और विज्ञान के रूप में दर्शन शास्त्र को प्लेटो ने विकसित किया था

Philosophy Meaning in Hindi

  1. दर्शन
  2. दर्शनशास्र
  3. तत्त्वज्ञान
  4. तत्त्वविज्ञान
  5. शास्र
  6. तत्त्वज्ञान
  7. विद्या का प्रेम
  8. दर्शन शास्त्र
  9. मानसिक शान्ति
  10. तर्क शास्त्र विद्या
  11. ज्ञान विद्या
  12. ज्ञान प्रीति
  13. फ़लसफ़ा(m)
  14. सिद्धांत(m)
  15. शास्त्र
  16. धैर्य(m)
  17. धारणा(f)
  18. तत्वविचार

Discovery of Philosophy

Philosophy originated in the slave society as a science which has closed the form of human knowledge of the object world and mainly itself about itself, its development of knowledge in the early stage of human history. Due to the low level, mainly due to the process of development of social production and accumulation of scientific knowledge, it can be said that this philosophy began to develop as an independent science. Philosophy was born as a distinct discipline out of the need to expand the general view of the subject and develop the principles of reasoning and cognition on the rationale of thinking about the grounds and rules of society and reality. The fundamental question of philosophy as a separate science is to establish and understand the problems of the relation of consciousness with the substance of contemplation with the Self so that the ultimate truth and the ultimate principle can be understood and the welfare of human life can be done.

दर्शनशास्त्र की उत्पत्ति दास स्वामी समाज में एक ऐसे विज्ञान के रूप में हुई जिसने वस्तु गत जगत एवं मुख्य रूप से स्वयं को अपने विषय में मनुष्य के ज्ञान के शक्ल योग को एक बंद किया है उनकी यह मानव इतिहास के आरंभिक सोपान में ज्ञान के विकास को निम्न स्तर के कारण मुख्य रूप से स्वभाविक तक के साथ सामाजिक उत्पादन के विकास और वैज्ञानिक ज्ञान के संचय की प्रक्रिया से भिन्न भिन्न विज्ञान दर्शनशास्त्र से पृथक होते हुए भी यह कहे जा सकते हैं कि यह दर्शनशास्त्र एक स्वतंत्र विज्ञान के रूप में विकसित होने लगा जगत की विषय में सामान्य दृष्टिकोण का विस्तार करने तथा समाज के आधारों व नियमों का यथार्थ के विषय में चिंतन की तर्क बुद्धि पर तर्क एवं संज्ञान के सिद्धांत विकसित करने की आवश्यकता से दर्शनशास्त्र का एक विशिष्ट अनुशासन के रूप में जन्म हुआ हम यह कह सकते हैं कि पृथक विज्ञान के रूप में दर्शन का आधारभूत प्रश्न स्वत्व के साथ चिंतन के भूत द्रव्य के साथ चेतना के संबंध की समस्याओं को स्थापित कर उसे समझना है जिससे कि परम सत्य और परम सिद्धांत को समझा जा सके

What is Philosophy or दर्शनशास्र

We can understand philosophy with the analysis of various subjects, through which we can also understand that in Indian philosophy there is a calmness of consciousness and the guest essentiality of consciousness which is not in modern philosophy, the ultimate goal of human life is to get rid of sufferings. The main goal of Indian philosophy is to achieve happiness, the main cause of suffering is to liberate human from ignorance and get him to attain salvation. Acquiring knowledge should be the main aim of every human race, which has been the tendency of curiosity and exploration in human beings since the time immemorial. Those who have the curiosity to know who want to attain human ecstasy, it is the fruit of his relentless effort to honor this curiosity that we are living in such a developed society today, but we can say that the ancient sages have created this material prosperity. Say no So there was satisfaction and not only the joy of happiness, we can say in this way that, in order to attain this truth and knowledge, the class started searching for knowledge from subtle to subtle and quality resources and in this they were successful. Received also the name of this true knowledge, the name of this power is the name of this supreme joy and its study is called philosophy.

दर्शनशास्त्र को विभिन्न विषयों के विश्लेषण के साथ हम समझ सकते हैं जिसके माध्यम से हम यह भी समझ सकते हैं कि भारतीय दर्शन में चेतना की निशांत सा और चेतना की मेहमान अनिवार्यता जो आधुनिक दर्शन में नहीं है मानव जीवन का चरम लक्ष्य दुखों से छुटकारा प्राप्त करके चीर आनंद की प्राप्ति करना है भारतीय दर्शन का मुख्य रूप से एक ही लक्ष्य दुखों के मूल कारण अज्ञान से मानव को मुक्ति दिला कर उसे मोक्ष की प्राप्ति करवाना है हम यह कह सकते हैं कि यानी कि अज्ञान वर्मा परंपरावादी और रूढ़िवादी विचारों को नष्ट करके सत्य ज्ञान को प्राप्त करना है प्रमुख रूप से प्रत्येक मानव जाति का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए जो सनातन काल से मानव में जिज्ञासा और अन्वेषण की प्रवृत्ति रही है उसे समझना चाहिए प्रकृति के उद्भव तथा सूर्य चंद्र और ग्रहों की स्थिति के अलावा परमात्मा के बारे में भी जो जानने की जिज्ञासा रखते हैं जो मानव परमानंद को पाना चाहते हैं इस जिज्ञासाओं का सम्मान करने के लिए उसने अनवरत प्रयास का फल है कि हम लोग आज इतने विकसित समाज में रह रहे हैं परंतु हम यह कह सकते हैं कि प्राचीन ऋषि मनीषियों ने इस भौतिक समृद्धि से नो तो संतोष हुआ और न चीर आनंद की प्राप्ति ही हुई हम इस प्रकार से यह कह सकते हैं कि अतः उन्होंने इसी सत्य और ज्ञान की प्राप्ति के क्रम में सूक्ष्म से सूक्ष्म एवं गुण संसाधनों से ज्ञान को तलाशा क्लास ने की आरंभ की और इसमें उन्हें सफलता भी प्राप्त हुआ इसी सत्य ज्ञान का नाम इसी शक्ति का नाम इसी परम आनंद का नाम दर्शन है जिन्हें यह दर्शन होता है वह सदा के लिए खुश हो जाते हैं वह परम आनंद को प्राप्त हो जाते हैं दर्शन मात्र से मनुष्य का जीवन सुख में हो जाता है और इसका अध्ययन करना ही दर्शनशास्त्र कहलाता है

दृश्यतेह्यनेनेति दर्शनम् (दृष्यते हि अनेन इति दर्शनम्)

In this human civilization, in this human civilization, what is true and false, what is true and what is false, what is non-living and what is living, its philosophy and its understanding is mainly the knowledge of true truth and true things, philosophy is Western Philosophy Word Phil And love is composed of Sophia wisdom, so philosophy literally means intellect love western philosophy A philosopher wants to be a wise and intelligent person, this knowledge is reflected in the history of western philosophy.

इस धरती पर इस मानव सभ्यता में सत्य और असत्य सत्य और असत्य पदार्थ का ज्ञान क्या सत्य है क्या असत्य है क्या निर्जीव हैं क्या सजीव हैं इसका दर्शन और इसकी समझदारी मुख्य रूप से यथार्थ सत्य एवं सत्य पदार्थों का ज्ञान ही दर्शन है पाश्चात्य फिलासफी शब्द फिल और प्रेम क्या सोफिया प्रज्ञा से मिलकर बना है इसलिए फिलासफी का शाब्दिक अर्थ है बुद्धि प्रेम पाश्चात्य दर्शन ए फिलॉस्फर बुद्धिमान एवं प्रज्ञा वान व्यक्ति बनना चाहता है पाश्चात्य दर्शन के इतिहास में यह ज्ञान झलक जाती है

Wise or Intelligent (बुद्धिमान या प्रज्ञावान )

Every human wants to become intelligent or intelligent person, it is reflected in the history of western philosophy that western philosopher has wanted to be intelligent only on the basis of subject knowledge, on the contrary, some examples are definitely found whose conduct is supreme on the basis of peace and mental precision. The ideal of interviewing with the week is also mainly found, but this ideal 569 that the Western philosopher insists on his knowledge and does not consider it necessary to conduct his character according to his knowledge, only Western mystic and samadhi ideas are his. There are exceptions, we can say that in Indian philosophy, another name for interviewing on the basis of Param Week is Darshan. But philosophical knowledge is said to be different from scientific knowledge, this is because in acquiring scientific knowledge, changes have to be made in the subject matter so that it can be subdued according to its desire and then It can be used, but according to Prachi philosophy, knowledge is a spiritual practice, it is only in such a lion philosopher, that he gets divine vision, through which he sees all beings from his holistic view, from contemporary ideology, Prachi philosophy and religion It is believed that western philosophy can be said to improve language and achieve and understand, thus we can say that such a philosophy through which life is seen in all beings and this philosophy is divine philosophy and Divine vision is needed to see this vision.

प्रत्येक मनुष्य बुद्धिमान या प्रज्ञा वान व्यक्ति बनना चाहता है पाश्चात्य दर्शन के इतिहास में यह झलक आती है कि पाश्चात्य दार्शनिक ने विषय ज्ञान के आधार पर ही बुद्धिमान होना चाहा है इसके विपरीत कुछ उदाहरण अवश्य मिलते हैं जिसके आचरण शांति एवं मनस्की परिशुद्धता के आधार पर परम सप्ताह के साथ साक्षात्कार करने का भी आदर्श मुख्य रूप से पाया जाता है परंतु यह आदर्श 569 कि पाश्चात्य पाश्चात्य दार्शनिक अपने ज्ञान पर जोर देता है और अपने ज्ञान के अनुरूप अपने चरित्र का संचालन करना अनिवार्य नहीं समझता केवल पाश्चात्य रहस्यवादी और समाधि वादी विचार ही उसके अपवाद हैं हम यह कह सकते हैं कि भारतीय दर्शन में परम सप्ताह के आधार पर साक्षात्कार करने का दूसरा नाम ही दर्शन है भारतीय परंपरा के अनुसार मनुष्य को परम सप्ताह का साक्षात ज्ञान हो सकता है इस प्रकार साक्षात्कार के लिए भक्ति ज्ञान तथा योग के मार्ग बताए गए हैं परंतु दार्शनिक ज्ञान को वैज्ञानिक ज्ञान से भिन्न कहा आता है ऐसा इसलिए क्योंकि वैज्ञानिक ज्ञान प्राप्त करने में आलोच्य विषय में परिवर्तन करना पड़ता है ताकि उसकी इच्छा के अनुसार वश में किया जा सके और फिर उसका उपयोग किया जा सके परंतु प्राची दर्शन के अनुसार ज्ञान जीवन साधना है ऐसे सिंह दार्शनिक में ही परिवर्तन हो जाता है जिससे उसे दिव्य दृष्टि प्राप्त हो जाती है जिसके द्वारा व समस्त प्राणियों को अपनी समरी दृष्टि से देखता है समसामयिक विचारधारा से प्राची दर्शन और धर्म दर्शन माना जाता है पाश्चात्य दर्शन को भाषा सुधार तथा प्राप्त एवं को समझते करण कहा जा सकता है इस प्रकार हम कह सकते हैं कि एक ऐसा दर्शन जिसके माध्यम से प्राणियों में समस्त प्राणियों में जीवन दर्शन हो जाता है और यह दर्शन ही दिव्य दर्शन है और इस दर्शन को देखने के लिए दिव्य दृष्टि की आवश्यकता है

Field of Philosophy

Philosophy mainly deals with the experience. In this interpretation, an effort is made to clarify what is asked. Efforts are made to open our senses to the outside. happens and we also see a new people, facts are visible, moral sense also commands Like the main subject for philosophy, considering the external world, the conscious soul would become the divine, we also want to consider its relationship and consider the relation of creation and creator in ancient times, mainly in the extended medieval period, soul and God The relation of matter became the main subject and in the modern period the relation between man and nature became the center of debate. the reason why physics looks outward Logic swing makes thinking the subject of contemplation. Policy wants to know whether there can be an absolute order of knowledge to organize the subject or not. We can say that physical reasoning and policy are all three in their own places in their respective works.

दर्शनशास्त्र मुख्य रूप से अनुभव की व्याख्या करता है इस व्याख्या में जो पूछो स्पष्ट होता है उसे और स्पष्ट करने का यत्न किया जाता है प्रयास किया जाता है हमारी ज्ञानेंद्रियां बाहर की ओर खुलती है हम प्रायः बाह्य जगत में विलीन रहते हैं कभी कभी हमारा ध्यान अंतर्मुखी होता है और हम एक नए लोग का दर्शन भी करते हैं तथ्य तो दिखाई देते ही हैं नैतिक भावना आदेश भी देती है वास्तविकता और संभावना का वेद आदर्श का प्रत्येक को व्यक्त भी करता है इस प्रत्यय के प्रभाव में हम ऊपर की ओर देखते हैं हम इस तरह दर्शन के लिए प्रमुख विषय बाह्य जगत चेतन आत्मा परमात्मा बन जाते इन पर विचार करते हुए हम स्वभाव था इसके संबंधों पर भी विचार करना चाहते हैं और विचार करते हैं प्राचीन काल में रचना और रचयिता का संबंध प्रमुख रूप से विस्तृत मध्यकाल में आत्मा और परमात्मा का संबंध प्रमुख विषय बन गया और आधुनिक काल में पुरुष और प्रकृति विषय और विषय का संबंध विविन का केंद्र बन गया हम इस प्रकार से यह कह सकते हैं कि प्राचीन यूनान में भौतिक तर्क और नीति यह तीनों दर्शनशास्त्र के तीन भाग समझे जाते थे और यही कारण है कि भौतिकी बाहर की ओर देखती है तर्क स्विंग चिंतन को चिंतन का विषय बनाता है नीति जानना चाहती है कि विषय को व्यवस्थित करने के लिए कोई निरपेक्ष आदेश ज्ञान हो सकती है या नहीं हम यह कह सकते हैं कि भौतिक तर्क और नीति तीनों ही अपने अपने स्थान पर अपने अपने कामों में लगी हुई तत्वज्ञान के प्रमुख प्रश्न यह है कि

The main question of applied philosophy (तत्वज्ञान)

  1. Apart from life, whether caste and gay also exist or not, this is a very funny question and the answer to these questions can be understood in different ways that what is the condition of the knower besides life and it’s clothes. (जान के अतिरिक्त जाता और गे का भी अस्तित्व है या नहीं यह बहुत ही मजेदार सवाल है और इस सवालों के जवाब को अलग अलग तरीके से समझी जा सकती है कि जान के अतिरिक्त ज्ञाता और यह का वस्त्र का स्थिति क्या है)
  2. What is the nature of the last week, is it one type, it is more than one type. In ancient times, the chief of policy was to understand the nature of Lakshmi Shrestha. In modern times, one was given the place of fundamental credit towards cutting duty. Third, evaluation of happiness controversy In this way we can say that it has to be understood that what exactly is the nature of the last week. (अंतिम सप्ताह का स्वरूप क्या है क्या वह एक प्रकार की यह एक से अधिक प्रकार की है प्राचीन काल में नीति का प्रमुख लक्ष्मी श्रेष्ठ के स्वरूप को समझना था आधुनिक काल में काटने कर्तव्य के प्रति एक को मौलिक प्रत्यय का स्थान दिया तृतीय प्रसन्नता का मूल्यांकन विवाद का विषय बना रहा है इस प्रकार से हम यह कह सकते हैं कि इसे समझना होगा की अंतिम सप्ताह का स्वरूप वास्तव में क्या है)

The main questions in epistemology(ज्ञानमीमांसा) are:

  1. What is life (जान क्या है )
  2. Is there even a possibility of life or not really(जान की संभावना भी है या वास्तव में है ही नहीं )
  3. How to acquire knowledge (ज्ञान प्राप्ति कैसे होती है )
  4. What are the limits of human knowledge (मानव ज्ञान की सीमाएं क्या है)

Epistemology has attracted the attention of thinkers in the modern period. At first philosophy was often taken as metaphysics, the goal of philosophers was to find out the system of the whole whenever it appeared that human intelligence was involved in this investigation. If it cannot go further, then some of the theories became the subject of discussion in Greece after Socrates, Plato and Aristotle, and in Germany, it happened after yesterday, realism and federalism are such principles, in such a philosophical discussion, the topics which are specially discussed It is happening in such a way that it should be understood that the thinkers have looked at these topics in different aspects according to their own interest, some have given special attention to one side, some have paid special attention to the other side but the problem is not solved. Below the sub-problems are present, so we can understand the main topic and which topic in this way.

ज्ञान मीमांसा ने आधुनिक काल में विचारकों के ध्यान को आकृष्ट किया है पहले मुख्य रूप से दर्शन को प्रायः तत्वज्ञान मैटेफिजिक्स के रूप में ही लिया जाता था दार्शनिकों का लक्ष्य समग्र की व्यवस्था का पता लगाना था जब कभी प्रतीत हुआ कि इस अन्वेषण में मनुष्य की बुद्धि आगे नहीं जा सकती तो कुछ कौन सिद्धांतों विवेचन के विषय बने यूनान में सुकरात प्लेटो और अरस्तू के बाद तथा जर्मनी में काट और है कल के बाद ऐसा हुआ यथार्थवाद और संघवाद ऐसी ही सिद्धांत है इस तरह दार्शनिक विवेचन में जिन विषयों पर विशेष रूप से विचार होता रहा है वह कुछ इस प्रकार से हैं जिसे समझना चाहिए इन विषयों को विचार ओके विचारकों ने अपनी अपनी रूचि के अनुसार विविध पक्षों में देखा है किसी ने एक पक्ष पर विशेष ध्यान दिया है किसी ने दूसरे पक्ष पर विशेष ध्यान दिया है परंतु समस्या के नीचे उप समस्याएं उपस्थित हो जाती है अतः हम मुख्य विषय और कौन विषय को इस प्रकार से समझ सकते हैं

(1) मुख्य विषय –

  • ज्ञानमीमांसा (Epistomology)
  • तत्वमीमांसा (Metaphysics)
  • नीतिमीमांसा (Ethics)
  • सौंदर्यशास्त्र (Aesthetics)
  • तर्कशास्त्र (Logic)

(2) गौण विषय –

  • यथार्थवाद
  • संदेहवाद

Indian philosophy (भारतीय दर्शन)

To understand Indian philosophy, one has to understand Vedas mainly because Indian philosophy which is all philosophy, in this way we can say that all philosophy has originated from Vedas, yet all Indian philosophy is divided into two parts theist and atheist. It has been divided that one who believes in God i.e. Shiva and those two like justice and education Yogini Manasa and Vedanta is considered economic and one who does not believe in Vedas is considered as an atheist or atheist or Vedic philosophy is the philosophy of the Vedas. They believe in the Vedas they are theists.

भारतीय दर्शन को समझने के लिए मुख्य रूप से वेदों को समझना होगा क्योंकि भारतीय दर्शन जो कि समस्त दर्शन है इस प्रकार से हम कह सकते हैं कि समस्त दर्शन की उत्पत्ति वेदों से ही हुई है फिर भी समस्त भारतीय दर्शन को आस्तिक एवं नास्तिक दो भागों में विभक्त किया गया है जो ईश्वर यानी शिवजी तथा वे दो जैसे न्याय व शिक्षा योगिनी मानसा और वेदांत पर विश्वास करता है उसे आर्थिक माना जाता है और जो वेदों पर विश्वास नहीं करता उसे नास्तिक माना गया है आस्तिक या वैदिक दर्शन ही वेदों की दर्शन है जो वेदों पर विश्वास करते हैं वह आस्तिक हैं

आस्तिक या वैदिक दर्शन

वैदिक परम्परा के 6 दर्शन हैं :

(1) मीमांसा

(2) न्याय

(3) वैशेषिक

(4) सांख्य

(5) योग

(6) वेदान्त

यह दर्शन पराविद्या, जो शब्दों की पहुंच से परे है, का ज्ञान विभिन्न दृष्टिकोणों से समक्ष करते हैं। प्रत्येक दर्शन में अन्य दर्शन हो सकते हैं, जैसे वेदान्त में कई मत हैं।

नास्तिक या अवैदिक दर्शन

  • चार्वाक दर्शन
  • बौद्ध दर्शन
  • जैन दर्शन

समकालीन भारतीय दार्शनिक

  1. श्री अरविन्द
  2. महात्मा गांधी
  3. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
  4. स्वामी विवेकानंद
  5. आचार्य रजनीश ओशो
  6. प्रभात रंजन सरकार

Western Philosophy (पाश्चात्य दर्शन)

प्राचीन पाश्चात्य दर्शन

  • सुकरात
  • प्लेटो

आधुनिक पाश्चात्य दर्शन

  • रेने देकार्त
  • स्पिनोजा
  • गाटफ्रीड लैबनिट्ज़
  • कांट
  • डेविड ह्यूम

समकालीन पाश्चात्य दर्शन

  • ज्यां-पाल सार्त्र
  • ए जे एयर
  • विट्गेंस्टाइन

Philosophy mainly explains that Metrology Kali now tweets this subject in truck form for Existence and Inquiry into the Major Different Dimensions to understand Intellectual History and Civilization explaining how humans Can be happy, what is the aspect of human happiness, which man himself will be able to be happy every time, for man’s happiness it is very important for man to understand himself We understand that by understanding ourselves, we will move forward by understanding this, know us.

दर्शनशास्त्र मुख्य रूप से इस बात की व्याख्या करती है कि मेट्रोलॉजी काली अब ट्रक रूप में प्रमुख अलग-अलग डाइमेंशंस में एक्जिस्टेंस और इंक्वायरी के लिए इंटेलेक्चुअल हिस्ट्री और सिविलाइजेशन के समझने के लिए इस सब्जेक्ट को ट्वीट करती है उसे समझाती है कि किस प्रकार से मनुष्य खुश रह सकते हैं मनुष्य की खुशी का कौन-कौन सा पहलू है जिसे मनुष्य खुद समझ कर हर हमेशा खुश रह पाएंगे मनुष्य के खुशी के लिए मनुष्य को अपने आप को समझना बहुत जरूरी होता है मनुष्य की समझदारी मनुष्य के लिए बहुत जरूरी होता है मनुष्य समझते हैं हम अपने आप को समझ कर इसे हम समझ कर अपने आप को आगे बढ़ाएंगे हमें जानते हैं



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