Physiology (शरीर क्रिया विज्ञान) Meaning in Hindi

Physiology, which we also know by the name of physiology, is the science under which the related natural phenomena of beings are studied and classified mainly, as well as the sequence of events and each function according to the importance of relativity. The organs of use are determined and the states from which each action is determined, we can say that physiology is mainly the branch of medical science in which the actions occurring in the body are studied. Under this, knowledge is taken about the functions of different organs and systems present in the body of man or any other animal or plant and the reasons for the existence of those functions as well as the laws of medical science related to them. One can understand that the ear performs the function of hearing and the eye performs the function of seeing, but in relation to hearing and seeing, physiology provides knowledge about how sound reaches the ear screen and the rays of light read through the lens of the eye. How the image of the object reaches the mastics, in the same way we can say that how the food that a man eats is digested, at the end of the digestion, how is his residue from the intestines, we do all these actions in the body. study in science physiology.



The physiology of human brain is mysterious(रहस्यमय) and fascinating(आकर्षक).

Processes and functions of an organism.

The branch of the biological sciences dealing with the functioning of organisms.

शरीर क्रिया विज्ञान जिससे कि हम फिजियोलॉजी के नाम से भी जानते हैं यह वह विज्ञान है जिसके अंतर्गत प्राणियों के संबंधित प्राकृतिक घटनाओं का अध्ययन और मुख्य रूप से उनका वर्गीकरण किया जाता है इसके साथ ही साथ घटनाओं का अनुक्रम और सापेक्षता के महत्व के अनुसार प्रत्येक कार्य के उपयोग के अंग निर्धारित और उन अवस्थाओं का अध्ययन किया जाता है जिन से प्रत्येक क्रिया निर्धारित होती है हम यह कह सकते हैं कि शरीर क्रिया विज्ञान मुख्य रूप से चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जिसमें शरीर में उत्पन्न होने वाली क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है इसके अंतर्गत मनुष्य या किसी अन्य प्राणी या पादप के शरीर में मौजूद भिन्न-भिन्न अंगों एवं तंत्रों सिस्टम के कार्य और उन कार्यों के होने के कारण तथा साथ ही साथ उनसे संबंधित चिकित्सा विज्ञान के नियमों का भी ज्ञान लिया जाता है हम इसे इस प्रकार से समझ सकते हैं कि कान सुनने का कार्य करता है और आंख देखने का कार्य करती है लेकिन शरीर क्रिया विज्ञान सुनने और देखने के संबंध में यह ज्ञान कराती है कि ध्वनि कान के परदे पर किस प्रकार पहुंचती हैं और प्रकाश की किरण आंखों के लेंस पर पढ़ते हुए किस प्रकार वस्तु की छवि मास्टिक्स तक पहुंचती है इसी प्रकार हम कह सकते हैं कि मनुष्य जो भोजन करता है उसका पाचन किस प्रकार से होता है पाचन के अंत में उसका आंतों की वित्तीय से अवशेष किस प्रकार होता है इन सभी क्रियाओं को हम शरीर क्रिया विज्ञान फिजियोलॉजी में अध्ययन करते हैं

  1. जीवतत्व
  2. शरीरविज्ञान
  3. जीवन विद्या
  4. प्राणीधर्म विद्या
  5. शरीर क्रिया विज्ञान
  6. जीवन पद्वति
  7. शरीर क्रियाविज्ञान
  8. कार्यिकी
  9. शरीरक्रियाविज्ञान

What are the basic natural phenomena of physiology

फिजियोलॉजी का मूल प्राकृतिक घटनाएं कौन-कौन सी है

We should understand that the basic natural phenomena of the life of all of us living beings are almost the same. Even if we want to understand it, then by paying attention to the subtle details of the actions, we are able to understand them, the events are recognized, they are in such a way that we can understand.

हमें यह समझना चाहिए यह हम सभी जीवित जी के जीवन का मूल प्राकृतिक घटनाएं लगभग एक जैसी है अत्यंत और समान जीवो के क्रिया विज्ञान अपनी समस्याएं अत्यंत स्पष्ट रुप में उपस्थित करता है अगर हम उच्च स्तरीय प्राणियों के शरीर के प्रधान अंगों की क्रियाएं अत्यंत विशिष्ट होते हुए भी समझना चाहे तो उसे क्रियाओं के सूक्ष्म विवरण पर ध्यान देने से हम उन्हें समझना संभव हो पाते हैं घटनाएं जी पहचाने जाते हैं वह कुछ इस प्रकार से हैं जिसे हम समझ सकते हैं

  1. Organization(संगठन):  It is more evident mainly in higher level beings, whose structure and development of action have almost similarity, which proves this statement to the physical action promises, which organ composition determines or gives action to different parts of the person. There is subtle cooperation in this, the power of adapting to the surrounding environment of the creatures increases.  यह मुख्य रूप से उच्च उच्च स्तरीय प्राणियों में अधिक स्पष्ट होती है जिसकी संरचना और क्रिया के विकास में लगभग समानता होती है जिससे शारीरिक क्रिया वादों को यह कथन सिद्ध होता है किस अंग रचना ही क्रिया का निर्धारण या उपादान करता है व्यक्ति के विभिन्न भागों में सूक्ष्म सहयोग होता है इसे प्राणियों के आसपास के वातावरण के अनुकूल बनने की शक्ति बढ़ती जाती है
  2. Consumption of energy (ऊर्जा की खपत):  We can understand Jiva energy in such a way that living beings excrete energy means to say that the life of human beings are passionately related to the environment by those physical activities, there is a continuous flow of energy of all these activities. And it is necessary that due to lack of food or oxygen, the activities in the body come to an end. The things from which our food items are made are capable of oxygen.  हम जीव ऊर्जा को इस प्रकार से समझ सकते हैं कि जीव ऊर्जा को विसर्जित करते हैं कहने का मतलब यह है कि मनुष्य का जीवन उन शारीरिक क्रियाकलापों से जोश से पर्यावरण के साथ संबंधित करते हैं निर्मित है इन सभी क्रियाकलापों के ऊर्जा का सतत व आवश्यक है भोजन अथवा ऑक्सीजन के अभाव से शरीर में क्रियाकलापों का अंत हो जाता है शरीर में अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होने पर उसकी पूर्ति भोजन एवं ऑक्सीजन की अधिक मात्रा से होती है हम यह कह सकते हैं कि जीवन के लिए स्वास्थ्य एवं सर्वांगीण क्रियाएं आवश्यक है जिन वस्तुओं के हमारे खाद्य पदार्थ बनते हैं ऑक्सीजन में सक्षम होती है इससे उत्पन्न होती है शरीर में होने वाले ऑक्सीकरण की उर्जा उत्पन्न होती है जो जीवित प्राणियों की क्रिया कलाप के लिए उपलब्ध रहती है
  3. Growth and birth(वृद्धि और जन्म) : are predominant, growth is bound to happen, which is the method with which the power of compensation is attached, the process of the process goes on for a certain time after which each organism splits and it separates into one or many new individuals. creates, each of them is endowed with all those qualities which are in the original organism, in all the higher quality organisms, the root starts to become tehsil and eventually gets death. प्रधान है वृद्धि होती ही है जो विधि होती है जिसके साथ क्षतिपूर्ति की शक्ति जुड़ी हुई होती है विधि का प्रक्रम एक निश्चित समय तक चलता है जिसके बाद प्रत्येक जीव विभक्त हो जाती है और उसका एक अलग होकर एक या अनेक नए व्यक्तियों का निर्माण करता है इनमें प्रत्येक उन सभी गुणों से युक्त होता है जो मूल जीव में होती है सभी उच्च कोटि के जीवो में मूलजी तहसील होने लगता है और अंततः मृत्यु को प्राप्त हो जाता है
  4. Adaptation(अनुकूलन): which we know by the name of Adaptation All living life has the same characteristics, that is the ability to adapt Interrelationship; if the name of the continuous coordination of relationships is adaptation, the environment of living cells is 30 feet in which this inter-environment animal lives. The survival of an organism is affected by changes in the environment for the fib to be affected by changes in the environment, regardless of the normal environment, that is, adaptation to the inter-environment.  जिसे हम एडेप्टेशन के नाम से जानते हैं सभी जीवित जीवन में एक समान लक्षण होते हैं वह अनुकूलन का सामर्थ्य अंतर्संबंध यदा हि संबंधों के सतत समन्वय का नाम ही अनुकूलन है जीवित कोशिकाओं का वातावरण वह उत्तरण 30 फीट है जिसमें रहती है यह अंतर वातावरण प्राणी के समान वातावरण में होने वाले परिवर्तनों से प्रभावित होती है जीव की उत्तरजीविता फाइबल के लिए वातावरण के परिवर्तनों के प्रभावित होना आवश्यक है जिसे सामान्य वातावरण चाहे जैसा हो अंतर वातावरण जीने योग्य सीमा में रहे यही अनुकूलन है

Method of physiology

Most of the knowledge of physiology has been obtained mainly from the study of daily life and patients. We can say that this knowledge has been available only from the experiments done on animals, its very close to chemistry physics, anatomy, anatomy and book science. Relation is this type of science whose analysis is built on the knowledge obtained from experiments done on living beings or parts isolated from them, which survive for some time in a favorable state, the properties and functions of different structural parts are known from experiments and we can say that in synthetic physiology we try to find out what type of organization mainly the actions of the body from the actions on the cell synthesized to form the cooperative reactions of the departments and how the organism forms the society. reacts to a change in conditions by properly relating its different colors to.

फिजियोलॉजी का अधिकांश ज्ञान मुख्य रूप से दैनिक जीवन और रोगियों के अध्ययन से उपलब्ध हुआ है हम यह कह सकते हैं कि यह ज्ञान प्राणियों पर किए गए प्रयोगों से ही उपलब्ध हो पाया है रसायन भौतिकी शरीर रचना विज्ञान एनाटॉमी और पुस्तक विज्ञान से इसका अत्यंत निकट का संबंध है इस प्रकार का विज्ञान है जिसका विश्लेषण फिजियोलॉजी जीवित प्राणियों पर अथवा उनसे पृथक कृत भागों पर जो अनुकूल अवस्था में कुछ समय जीवित रह जाते हैं पर किए गए प्रयोगों से प्राप्त ज्ञान से निर्मित है प्रयोगों से विभिन्न संरचनात्मक भागों के गुण और क्रियाएं ज्ञात होती है और हम यह कह सकते हैं कि संश्लेषित फिजियोलॉजी में हम यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि मुख्य रूप से किस प्रकार की संघटन सेल पर कर्मों से शरीर की क्रियाएं संश्लेषित होकर विभागों की सहकारी प्रतिक्रियाओं का निर्माण करती है और किस प्रकार जीव समिति रूप में अपने भिन्न-भिन्न रंगों का सम्यक रूप से संबंधित होकर बाय परिस्थितियों के परिवर्तन पर प्रतिक्रिया करती है

Organisms of the same species, both structurally and physiologically, are very similar to each other, and the main tendency of the human form from the characteristics of the organism is the expression of the almost harmony between the organism and its environment, produced at the same time from one birth. This similarity in animals is almost the same, although what we consider in relation to the desires of beings of other species, if we study this in the Vedas, then the difference between the animal-formed creatures of the classification of animals is so much that it can be compared. In spite of being almost and clear, we try to find it out, we can say that in individual beings where there is almost a close relationship, like in the human race, their differences are also unclear, studying the normal human individual human Physiology has a duty because it prepares an important ground for the study of diseases, but it is very difficult to say what is the natural nature of any object, character, besides, the results of all functional experiments show a sufficiently clear difference. which depends on the individual nature of the usable beings so we should not critically have proper control and prime value of important results Prior result should be considered ideal results for definite iteration of experiments is necessary error which force in real science It used to be more than victory because due to the variable individual, there is a variable or species in the projection, in science the results are varied by the same way, mainly from the physiology, the tendency of the laws of potential is discussed. It is expected to be constructed very carefully from the point of view whether the result obtained is control or not, we can understand in such a way that as a method of removing the difficulties, recourse to mean and parallel mean is taken which we eat. It can be said that the average number of red lions per cubic millimeter in a particular community of humans is 520 million, although the simplest and tree is but there is no means through planning.

संरचना और शरीर क्रियात्मक दोनों में से एक ही जाति के प्राणी आपस में बहुत मिले-जुले हैं और जीव लक्षणों से मानव प्रारूप की और उन मुख्य प्रवृत्ति जीव और उसके वातावरण के बीच लगभग सामंजस की अभिव्यक्ति होती है एक जन्म से एक ही समय में उत्पन्न प्राणियों में यह समानता लगभग समान होती है हालांकि जो जो हम अन्य जातियों के प्राणियों की तमन्नाओं के संबंध में विचार करते हैं उनमें वेद वर्कर हम यह अध्ययन करते हैं तब हम प्राणियों के वर्गीकरण के जंतु गठित प्राणियों का अंतर इतना अधिक होता है कि इसकी तुलना लगभग और स्पष्ट होने के बावजूद भी हम इसे पता करने का प्रयास करते हैं हम यह कह सकते हैं कि व्यष्टि प्राणियों में जहां लगभग निकट का संबंध होता है जैसे कि मनुष्य जाति में वहां इनके अंतर भी अस्पष्ट होते हैं सामान्य मानव व्यष्टि का अध्ययन करना मानव फिजियोलॉजी का कर्तव्य है क्योंकि इनसे रोगों का अध्ययन की महत्वपूर्ण आधार भूमि तैयार होती है परंतु यह कहना कि किसी वस्तु लक्षण करैक्टर का प्राकृतिक स्वरूप क्या है यह बहुत कठिन है इसके अतिरिक्त सभी क्रियात्मक प्रयोगों के परिणामों से पर्याप्त स्पष्ट अंतर प्रदर्शित होता है जो प्रयोज्य प्राणियों की व्यक्तिगत प्रकृति पर निर्भर करता है इसलिए हम महत्वपूर्ण रूप से समुचित नियंत्रक और महत्वपूर्ण परिणामों के आदि मूल्य नहीं होना चाहिए प्रायर परिणाम निश्चित के लिए आदर्श परिणामों पर विचार किया जाना चाहिए प्रयोगों की पुनरावृति आवश्यक है त्रुटि जो यथार्थ विज्ञान में बल होती थी जीत से अधिक होती थी क्योंकि परिवर्ती व्यष्टि के कारण प्रक्षेप में परिवर्तनशील या जाति होती है विज्ञान में परिणामों की द्वारा विविध किया जाता है वैसे ही मुख्य रूप से फिजियोलॉजी की ओर से संभावित के नियमों की प्रवृत्ति के विवेचन किया जाता है इसके लिए प्रयोग से निर्मित लेने में बहुत सावधानी पूर्वक इस दृष्टि से अपेक्षित है कि प्राप्त परिणाम नियंत्रण अथवा है या नहीं हम इस प्रकार से समझ सकते हैं की कठिनाइयों को दूर करने की एक विधि के रूप में औसत और समानांतर माध्य का आश्रय लिया जाता है जिसे हम खा सकते हैं कि मानव के किसी समुदाय विशेष में प्रति घन मिलीमीटर में लाल शेरों का औसत संख्या 5 करोड़ 20 लाख है यद्यपि सबसे सरल और वृक्ष है परंतु योजना के माध्यम से कोई साधन नहीं है

Development of physiology

To understand the current state of medical science, it is very important to have knowledge of its entire development and history and it is also necessary that it is important for people interested in physiology to be familiar with the outline of its history as far as the overall subject matter. It is a question of evolution or a matter to be kept in mind that science cannot develop separately. All the parts are progressing in dependence on each other for example without knowledge of body anatomy to a certain extent it was impossible to imagine physiology. And in the same way, progress of physics and chemistry to an extent in the developed state or without the stage was impossible. Andhra analysis considers the publication of Fabrica u mani ka Puri in 15 to 43 AD as the beginning of the modern body, to name a few examples. From which we have come from time to time and in this way we have come from the full name of the modern body, from the method of application of science to the beginning of the use of the word in biology, to the development of modern physics and to prepare the text of physiology. relationship of exploitation and abuse establish cell theory with important curriculum the great experimentalists invent the great experimentalist method to understand the application of physics and in such a way that a journal of physiology for the English General of Physiology thereafter developed into a branch Has happened.

चिकित्सा विज्ञान की वर्तमान अवस्था को समझने के लिए उसके पूरे विकास तथा इतिहास का ज्ञान होना बहुत जरूरी होता है और यह आवश्यक भी है इसीलिए फिजियोलॉजी से रुचि रखने वाले व्यक्तियों के लिए इसके इतिहास की रूपरेखा से परिचित होना महत्वपूर्ण आवश्यक है जहां तक समग्र विषय के विकास का प्रश्न है या ध्यान रखने की बात है कि विज्ञान की कोई अलग से विकसित नहीं हो सकता सभी भाग एक दूसरे से निर्भर होते हुए आगे बढ़ रहे हैं उदाहरण के लिए एक निश्चित सीमा तक शरीर एनाटॉमी के ज्ञान के बिना फिजियोलॉजी की कल्पना असंभव थी और इसी प्रकार भौतिकी और रसायन की एक सीमा तक विकसित अवस्था में या अवस्था के बिना बीच की प्रगति असंभव थी आंध्र विश्लेषण द्वारा 15 से 43 ईसवी में फैब्रिका यू मनी का पुरी के प्रकाशन को आधुनिक शरीर का सूत्रपात मानकर कुछ उदाहरणों के नाम सूची प्रस्तुत कर रहे हैं जिससे समय-समय पर आया है और इस प्रकार से हम आधुनिक शरीर का पूरा नाम से लेकर जी विज्ञान के प्रयोग विधि से लेकर जीव विज्ञान में शब्द के प्रयोग का आरंभ होने से लेकर आधुनिक भौतिकी का विकास तथा फिजियोलॉजी का पाठ्य ग्रंथ को तैयार करना और शोषण का संबंध स्थापित करना महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम के साथ कोशिका सिद्धांत की स्थापना करना महान प्रयोगवादी महान प्रयोगवादी विधि का आविष्कार करना भौतिकी के प्रयोग को समझना और इस प्रकार से सकते हैं कि फिजियोलॉजी की एक पत्रिका ने के लिए इंग्लिश जनरल ऑफ फिजियोलॉजी इसके बाद एक शाखा के रूप में विकसित हुआ है

Various diseases and the organs affected by them

Diseases caused by bacteria

disease name affected limb name of germ Symptoms
cholera Digestive System Bibio cholerae Vomiting and diarrhea, cramps in the body and dehydration (dehydration)
T. B. Lungs mycobacterium tuberculosis Cough, fever, chest pain, bleeding from the mouth
whooping cough lung Vasilum pertussis frequent coughing
pneumonia Lungs diplococcus pneumoniae chest pain, trouble breathing
bronchitis the respiratory system bacteria chest pain, trouble breathing
pleurisy Lungs bacteria Chest pain, fever, trouble breathing
plague lymph nodes Pasteurella Pastis Body aches and high fever, red eyes and discharge of nodules
diphtheria Neck corny vactrium sore throat, difficulty in breathing
leprosy the nervous system mycobacterium leprae cut off fingers, stains on the body
typhoid Intestine typhi salmonel Rapid rise in fever, abdominal discomfort and dyspepsia
Tetanus spinal cord Clostridium titonai muscle contractions
gonorrhea reproductive organs nigeria gonorrhoeae Inflammation and sores in the genital tract, Difficulty in urinating
syphilis reproductive organs Padedum in Tryponema Inflammation and sores in the genital tract, Difficulty in urinating
meningitis Brain Padedum in Tryponema Headache, fever, vomiting and fainting
influenza the respiratory system phifers vasellus Watery nose, Headache, Eye pain
trachoma eye bacteria headache, eye pain
Rhinitis Nose elegentus nasal congestion, headache
scarlet fever the respiratory system bacteria Fever

Virus diseases

disease name affected limb Symptoms
mumps parotid salivary glands Swelling of salivary glands, swelling of pancreas, ovaries and testes, fever, headache. There is a risk of infertility due to this disease.
flu or influenza the respiratory system Fever, body aches, headache, cold, cough
rabies or hydrophobia the nervous system Fever, body aches, fear of water, paralysis of muscles and respiratory system, fainting, restlessness. It is a fatal disease.
Measles full body Fever, Pain, Itching all over the body, Burning in eyes, Fluid discharge from eyes and nose
chicken pox whole body especially face and hands and feet Fever, pain, burning and discomfort, blisters all over the body
polio the nervous system Inhibition of muscle contraction and paralysis in the extremities
harpies skin, mucosa Skin irritation, discomfort, boils on the body
Encephalitis the nervous system Fever, restlessness, blurred vision, insomnia, fainting. it is a deadly disease

Vitamin deficiency diseases

Vitamins Disease Source
Vitamin A Night blindness , layer windpipe Pdnha Papaya, Butter, Ghee, Egg and Carrot
Vitamin B1 beri-beri Lentils, Eggs and Yeast
Vitamin B2 Dermatitis, Intestinal ulcer, Tongue ulceration Leafy Vegetables, Meat, Milk, Egg
Vitamin B3 skin diseases and ulcers in the mouth Yeast, egg, meat, seeded vegetables, green vegetables etc.
Vitamin B6 skin diseases Milk, Egg Yolk, Mutton etc.


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